LAXMAN, TOPASS
SHAURYA CHAKRA
Award
SHAURYA CHAKRA
Year of Award
1952 (Republic Day)
Service No.
62226
Rank at time of Award
Father's Name
NA
Mother's Name
NA

Citation

शौर्य चक्र के लिए प्रशस्ति पत्र
लक्ष्मण टोपास (62226)

26 जनवरी, 1952 के गणतंत्र दिवस को भा नौ पो दिल्ली को कलकत्ता की आम जनता को देखने के लिए खोल दिया गया था। छुट्टी का दिन था, इसलिए भारी संख्या में लोग मैन-ऑफ वार जेट्टी की तरफ बढ़ गए जिसके पास भा नौ पो दिल्ली लंगर डाले हुए था। भीड़ बढ़ती गई और करीब 1400 बजे तक जेट्टी पर और उसके पहुंच मार्ग पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। आगंतुकों को पोत पर ले जाने वाली नाव पर सवार होने के लिए लोगों में जबर्दस्त धक्का-मुक्की होने लगी। बेतहाशा बढ़ती हुई भीड़ पुलिस के घेरे को तोड़कर जेट्टी के एक तरफ दौड़ पड़ी। जेट्टी की तरफ जाने वाली सीढ़ी की रक्षात्मक रेलिंग टूट गई और अनियंत्रित भीड़ से धक्का खाकर कई लोग नदी में गिर गए। जिस समय यह त्रासदी हुई उस समय लक्ष्मण टोपास, ओ न. 62226, जो पोशाक सं. 10 पहने थे और अपने अतिथियों का जेट्टी पर इंतजार कर रहे थे। लोगों को नदी में गिरते हुए देखकर इन्होंने बिना हिचकिचाहट तथा व्यक्तिगत सुरक्षा की तनिक भी परवाह न करते हुए नदी में छलांग लगा दी तथा डूबते हुए लोगों को बचाना शुरू कर दिया। उस समय नदी में प्रबल ज्वार आया हुआ था जिससे इनका काम और भी श्रमसाध्य एवं कठिन हो गया। हुगली के प्रचंड तथा जोखिम भरे ज्वार के बावजूद ये जल में तब तक बने रहे जबतक कि इन्होंने अकेले 7 व्यक्तियों, जिनमें महिलाएं तथा बच्चे शामिल थे, को बचा नहीं लिया। अंत में जब वे पानी से बाहर निकले तो वे बुरी तरह से थक गए थे। पानी से बाहर आ जाने के बाद भी, वे लोगों को और अधिक जाने बचाने में मदद करते रहे। उन्होंने महान पहल शक्ति, तत्परता, सूझ-बूझ तथा अपने जीवन के प्रति पूर्ण उपेक्षा का प्रदर्शन करते हुए एक उदाहरण पेश किया है जो नौसेना की उच्चतम परंपराओं के सर्वथा अनुरूप है।

LAXMAN, TOPASS